भूल जाते हैं
अक्सर घर से निकलते हुए
लोग भूल जाते हैं
बत्तियाँ बुझाना और नल बन्द करना
दुकानों पर भूल जाते हैं
साबुन या तेल की शीशी
या नमक का पैकेट ही
सब्जियों के ठेलों पर
भूल जाते हैं
मिर्च के साथ धनिए की तुकबंदी
दोस्तों के घर
भूल जाते हैं
किताबें, बैग, पर्स, घड़ी, चश्मा
मंदिरों के बाहर
चप्पलों के साथ भूल जाते हैं
अपना असली चेहरा
ऊंचाइयों पर पहुँचते हैं
और भूल जाते हैं
बीता हुआ समय
काम पर जाते हैं और
चौखट पर ही
भूल जाते हैं
अपनी आत्मा।
© Shivam chaubey

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